Paper Leak: 163 FIR, 569 गिरफ्तार, 188 की सेवाएं समाप्त; राजस्थान सरकार ने बताया ढाई साल में क्या कार्रवाई ...
Paper Leak: 163 FIR, 569 गिरफ्तार, 188 की सेवाएं समाप्त; राजस्थान सरकार ने बताया ढाई साल में क्या कार्रवाई ... News18 Hindi
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सोनम वांगचुक ने जेपी नड्डा के हाथों अपना अनशन तोड़ा. सवाल उठ रहा है कि क्या वांगचुक को सीजेपी के नेताओं के हाथों अनशन नहीं तोड़ना चाहिए था? इसके अलावा भी दोनों की सोच में फ़र्क़ साफ़ दिख रहा है.

नीट का पेपर लीक होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च बुलाया. उसके बाद से सेंट्रल दिल्ली में जो कुछ देखने को मिल रहा है, उसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी.

करीब 5 महीने बाद भी एक टीचर और एक मां के दिल में मिनाब के स्कूल पर हुए हमले की दर्दनाक यादें ताजा हैं. जिस इमारत में पहले कभी बच्चे पढ़ा करते थे, वह अब खंडहर हो चुकी है.

सोनम वांगचुक ने अपना उपवास तब तोड़ा है, जब बीजेपी के भीतर से ही छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे थे और सीजेपी ने देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है.

अलग-अलग जगहों से स्टूडेंट्स के प्रदर्शन की ख़बरें आ रही हैं और देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी इस आंदोलन की लगातार कवरेज कर रहा है. जिसके बाद प्रधानमंत्री ने ये वीडियो मैसेज अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों के क़रीब 100 सांसद देर शाम तीस जनवरी मार्ग स्थित गांधी स्मृति पहुंचे. उन्होंने नीट प्रश्नपत्र लीक के बाद जान गंवाने वाले छात्रों और विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों के लिए प्रार्थना की.

बीते 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस की झड़प के बाद इस प्रोटेस्ट की सूरत बदल गई है.

पीएम मोदी ने कहा है कि पेपर लीक के दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए सरकार ने फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का फ़ैसला किया है.

नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग और दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन कई देशों में सुर्खियों में है.

दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान कई युवा घायल हुए थे. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कुछ जगहों पर झड़प हुई, जिसमें पुलिसकर्मी भी घायल हुए. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने बयान जारी किया है.

दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई के बाद युवाओं ने अपने अनुभव इंस्टाग्राम रीलों और मीम के ज़रिए शेयर किए. ख़ौफ़ और हिंसा के बीच हास्य उनकी अभिव्यक्ति का अहम हिस्सा बनकर उभरा.

देहरादून–ऋषिकेश सिक्स लेन परियोजना के लिए सड़क चौड़ीकरण के मकसद से काटे जा रहे पेड़ों के विरोध में आम लोग खड़े हो गए. सीएम धामी को पेड़ों की कटाई रुकवानी पड़ी मगर अब भी प्रदर्शनकारी वहां क्यों इकट्ठे हो रहे हैं, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

इससे पहले भी मोदी सरकार के कई मंत्रियों के इस्तीफ़े की मांग उठ चुकी है. बीजेपी अपने मंत्रियों के इस्तीफ़े के मामले में अब तक सख़्त रही है. यानी इन मांगों को अनसुना करती रही है.

बिना किसी मेडिकल मदद के एक जैसे दिखने वाले चार बच्चों का एक साथ जन्म होना बहुत ही दुर्लभ है.

युवाओं के आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार उनकी चिंताओं पर अपनी राय रखी है. तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष ने भी सरकार को घेरा है.

सऊदी अरब और अमेरिका के बीच हुआ परमाणु समझौता कई कारणों से विवादों में है.आलोचकों का मानना है कि इससे मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों की होड़ तेज़ हो सकती है.

केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ सीजेपी का आंदोलन अभी थमा नहीं है. देश की कई हस्तियों ने आंदोलन के बार में अपनी राय रखी है. अरुंधति रॉय ऐसा नहीं मानती हैं कि इस आंदोलन से चीज़ें अचानक से बहुत बदल जाएंगी.

सीजेपी के प्रोटेस्ट और अन्ना आंदोलन के मुद्दे अलग-अलग हैं, राजनीतिक परिस्थितियां भी अलग हैं, सवाल ये है कि क्या यह आंदोलन भी वैसा ही राजनीतिक असर पैदा कर पाएगा जैसा अन्ना आंदोलन ने किया था?

आशुतोष रांका ने कहा है कि अगर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग सरकार ने नहीं मानी तो बात प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े तक पहुंच जाएगी.

घायल होने के बाद भी लोग प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हैं. इनका क्या कहना है? देखिए इस ग्राउंड रिपोर्ट में.

सोनम वांगचुक ने जेपी नड्डा के हाथों अपना अनशन तोड़ा. सवाल उठ रहा है कि क्या वांगचुक को सीजेपी के नेताओं के हाथों अनशन नहीं तोड़ना चाहिए था? इसके अलावा भी दोनों की सोच में फ़र्क़ साफ़ दिख रहा है.

नीट का पेपर लीक होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च बुलाया. उसके बाद से सेंट्रल दिल्ली में जो कुछ देखने को मिल रहा है, उसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी.

करीब 5 महीने बाद भी एक टीचर और एक मां के दिल में मिनाब के स्कूल पर हुए हमले की दर्दनाक यादें ताजा हैं. जिस इमारत में पहले कभी बच्चे पढ़ा करते थे, वह अब खंडहर हो चुकी है.

सोनम वांगचुक ने अपना उपवास तब तोड़ा है, जब बीजेपी के भीतर से ही छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे थे और सीजेपी ने देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है.

अलग-अलग जगहों से स्टूडेंट्स के प्रदर्शन की ख़बरें आ रही हैं और देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी इस आंदोलन की लगातार कवरेज कर रहा है. जिसके बाद प्रधानमंत्री ने ये वीडियो मैसेज अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों के क़रीब 100 सांसद देर शाम तीस जनवरी मार्ग स्थित गांधी स्मृति पहुंचे. उन्होंने नीट प्रश्नपत्र लीक के बाद जान गंवाने वाले छात्रों और विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों के लिए प्रार्थना की.

बीते 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस की झड़प के बाद इस प्रोटेस्ट की सूरत बदल गई है.

पीएम मोदी ने कहा है कि पेपर लीक के दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए सरकार ने फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का फ़ैसला किया है.

नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग और दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन कई देशों में सुर्खियों में है.

दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान कई युवा घायल हुए थे. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कुछ जगहों पर झड़प हुई, जिसमें पुलिसकर्मी भी घायल हुए. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने बयान जारी किया है.

दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई के बाद युवाओं ने अपने अनुभव इंस्टाग्राम रीलों और मीम के ज़रिए शेयर किए. ख़ौफ़ और हिंसा के बीच हास्य उनकी अभिव्यक्ति का अहम हिस्सा बनकर उभरा.

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इससे पहले भी मोदी सरकार के कई मंत्रियों के इस्तीफ़े की मांग उठ चुकी है. बीजेपी अपने मंत्रियों के इस्तीफ़े के मामले में अब तक सख़्त रही है. यानी इन मांगों को अनसुना करती रही है.

बिना किसी मेडिकल मदद के एक जैसे दिखने वाले चार बच्चों का एक साथ जन्म होना बहुत ही दुर्लभ है.

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घायल होने के बाद भी लोग प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हैं. इनका क्या कहना है? देखिए इस ग्राउंड रिपोर्ट में.

सोनम वांगचुक ने जेपी नड्डा के हाथों अपना अनशन तोड़ा. सवाल उठ रहा है कि क्या वांगचुक को सीजेपी के नेताओं के हाथों अनशन नहीं तोड़ना चाहिए था? इसके अलावा भी दोनों की सोच में फ़र्क़ साफ़ दिख रहा है.

नीट का पेपर लीक होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च बुलाया. उसके बाद से सेंट्रल दिल्ली में जो कुछ देखने को मिल रहा है, उसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी.

करीब 5 महीने बाद भी एक टीचर और एक मां के दिल में मिनाब के स्कूल पर हुए हमले की दर्दनाक यादें ताजा हैं. जिस इमारत में पहले कभी बच्चे पढ़ा करते थे, वह अब खंडहर हो चुकी है.

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अलग-अलग जगहों से स्टूडेंट्स के प्रदर्शन की ख़बरें आ रही हैं और देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी इस आंदोलन की लगातार कवरेज कर रहा है. जिसके बाद प्रधानमंत्री ने ये वीडियो मैसेज अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों के क़रीब 100 सांसद देर शाम तीस जनवरी मार्ग स्थित गांधी स्मृति पहुंचे. उन्होंने नीट प्रश्नपत्र लीक के बाद जान गंवाने वाले छात्रों और विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों के लिए प्रार्थना की.

बीते 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस की झड़प के बाद इस प्रोटेस्ट की सूरत बदल गई है.

पीएम मोदी ने कहा है कि पेपर लीक के दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए सरकार ने फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का फ़ैसला किया है.

नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग और दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन कई देशों में सुर्खियों में है.

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सोनम वांगचुक ने जेपी नड्डा के हाथों अपना अनशन तोड़ा. सवाल उठ रहा है कि क्या वांगचुक को सीजेपी के नेताओं के हाथों अनशन नहीं तोड़ना चाहिए था? इसके अलावा भी दोनों की सोच में फ़र्क़ साफ़ दिख रहा है.

नीट का पेपर लीक होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च बुलाया. उसके बाद से सेंट्रल दिल्ली में जो कुछ देखने को मिल रहा है, उसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी.

करीब 5 महीने बाद भी एक टीचर और एक मां के दिल में मिनाब के स्कूल पर हुए हमले की दर्दनाक यादें ताजा हैं. जिस इमारत में पहले कभी बच्चे पढ़ा करते थे, वह अब खंडहर हो चुकी है.

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों के क़रीब 100 सांसद देर शाम तीस जनवरी मार्ग स्थित गांधी स्मृति पहुंचे. उन्होंने नीट प्रश्नपत्र लीक के बाद जान गंवाने वाले छात्रों और विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों के लिए प्रार्थना की.

बीते 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस की झड़प के बाद इस प्रोटेस्ट की सूरत बदल गई है.

पीएम मोदी ने कहा है कि पेपर लीक के दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए सरकार ने फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का फ़ैसला किया है.

नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग और दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन कई देशों में सुर्खियों में है.

दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान कई युवा घायल हुए थे. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कुछ जगहों पर झड़प हुई, जिसमें पुलिसकर्मी भी घायल हुए. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने बयान जारी किया है.

दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई के बाद युवाओं ने अपने अनुभव इंस्टाग्राम रीलों और मीम के ज़रिए शेयर किए. ख़ौफ़ और हिंसा के बीच हास्य उनकी अभिव्यक्ति का अहम हिस्सा बनकर उभरा.

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युवाओं के आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार उनकी चिंताओं पर अपनी राय रखी है. तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष ने भी सरकार को घेरा है.

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केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ सीजेपी का आंदोलन अभी थमा नहीं है. देश की कई हस्तियों ने आंदोलन के बार में अपनी राय रखी है. अरुंधति रॉय ऐसा नहीं मानती हैं कि इस आंदोलन से चीज़ें अचानक से बहुत बदल जाएंगी.

सीजेपी के प्रोटेस्ट और अन्ना आंदोलन के मुद्दे अलग-अलग हैं, राजनीतिक परिस्थितियां भी अलग हैं, सवाल ये है कि क्या यह आंदोलन भी वैसा ही राजनीतिक असर पैदा कर पाएगा जैसा अन्ना आंदोलन ने किया था?

आशुतोष रांका ने कहा है कि अगर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग सरकार ने नहीं मानी तो बात प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े तक पहुंच जाएगी.

घायल होने के बाद भी लोग प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हैं. इनका क्या कहना है? देखिए इस ग्राउंड रिपोर्ट में.

सोनम वांगचुक ने जेपी नड्डा के हाथों अपना अनशन तोड़ा. सवाल उठ रहा है कि क्या वांगचुक को सीजेपी के नेताओं के हाथों अनशन नहीं तोड़ना चाहिए था? इसके अलावा भी दोनों की सोच में फ़र्क़ साफ़ दिख रहा है.

नीट का पेपर लीक होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च बुलाया. उसके बाद से सेंट्रल दिल्ली में जो कुछ देखने को मिल रहा है, उसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी.

करीब 5 महीने बाद भी एक टीचर और एक मां के दिल में मिनाब के स्कूल पर हुए हमले की दर्दनाक यादें ताजा हैं. जिस इमारत में पहले कभी बच्चे पढ़ा करते थे, वह अब खंडहर हो चुकी है.

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अलग-अलग जगहों से स्टूडेंट्स के प्रदर्शन की ख़बरें आ रही हैं और देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी इस आंदोलन की लगातार कवरेज कर रहा है. जिसके बाद प्रधानमंत्री ने ये वीडियो मैसेज अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया.

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घायल होने के बाद भी लोग प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हैं. इनका क्या कहना है? देखिए इस ग्राउंड रिपोर्ट में.